बसंत की हवा में झूमते ट्यूलिप - होकुरयू कस्बे में खिलते लाल और पीले फूलों की बसंत कविता

गुरुवार, 14 मई, 2026

जैसे ही होक्काइडो की लंबी सर्दी धीरे-धीरे समाप्त होती है और धरती मानो सांस ले रही हो, वैसे ही छोटी-छोटी फूलों की परियां होकुरयू कस्बे के गली-नुक्कड़ों पर उतरने लगती हैं।

जैसे लाल और पीले रंग का पेंट बर्फ के शुद्ध सफेद कैनवास में धीरे-धीरे घुलमिल जाता है, वैसे ही ट्यूलिप के सभी फूल एक साथ खिलने लगे हैं।

सड़क के किनारे फूलों की क्यारियों में, ज्वालाओं की तरह लाल ट्यूलिप और सूरज की रोशनी को प्रतिबिंबित करने वाले पीले ट्यूलिप साथ-साथ खिलते हैं, जिससे राहगीरों को शांति और सुकून का एहसास होता है।

बगीचे में खिले हुए ट्यूलिप के फूल, चाहे बड़े हों या छोटे, सभी एक परिवार की तरह एक साथ आकाश की ओर बढ़ रहे हैं।

"वे खिल गए हैं, वे खिल गए हैं, ट्यूलिप के फूल खिल गए हैं~♪"

वह एक शांत दोपहर थी, ऐसी दोपहर जिसमें ऐसा लगता है कि कहीं से वसंत की हवा के साथ एक मधुर गायन की आवाज बहकर आ सकती है।

फूलों से गहरा प्रेम रखने वाले और उन्हें सावधानीपूर्वक उगाने वाले लोगों की शांत करुणा राहगीरों की आंखों को सुकून देती है और यात्रियों के दिलों को गर्माहट से भर देती है।

होकुरयू कस्बे में वसंत ऋतु फूलों का पर्याय है। और फूलों से परे, लोगों की दयालुता की एक हल्की सी झलक दिखाई देती है।

春風に揺らぐチューリップ
बसंत की हवा में लहराते ट्यूलिप
笑顔輝くチューリップさんたち
चमकीली मुस्कान वाले ट्यूलिप
楽しげな歌声が風に靡く
एक मधुर गायन की आवाज हवा में गूंज रही है।

◇ नोबोरु और इकुको