मुझे खुशी है कि मैं अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के खाली समय में (कपास कताई) किसी चीज़ को आकार दे पाई। सोच रही हूँ कि क्या मैं कुछ बुन पाऊँगी। [दरवाज़ा खोलो, केइको ओज़ाकी]